ऐसी की तैसी ज्योतिषि की

ऐसी की तैसी ज्योतिषि की

 
     एक बार एक ब्यक्ति घूमता हुवा एक ज्योतिषि के घर के बाहर पहुँचा। घर काफी बड़ा और सुन्दर था जिसके बाहर शानदार मैदान था, चारों ओर करीब सात फिट की ऊँची बाउन्ड्री थी, प्रवेश गेट भी काफी शानदार था। कुल मिलाकर घर महल की तरह बनाया गया था। बाहर गेट के पास शानदार तरीके से लिखा हुवा एक बोर्ड टंगा हुवा था, जिस पर पेन्टर ने काफी आकर्षक तरीके से ज्योतिषि महाराज के बारे में जानकारी देने के साथ अन्य आवश्यक सूचनायें जैसे- ज्योतिषि सम्राट से मिलने का समय, उनका फोन नम्बर आदि के साथ उनकी डिग्रियों का भी बखान किया था।
    महल को देखने के बाद वह ब्यक्ति गेट की तरफ गया। रास्ते के दोनों ओर कई कारें और अन्य सवारी गाड़ियाँ भी खड़ी थी जिनमें वो लोग आये थे जिनको ज्योतिषि सम्राट से मिलना था। गाड़ियों के आने का सिलसिला जारी था। काफी संख्या में लोग गेट से अन्दर आ-जा रहे थे। आने वालों को अन्दर कहाँ जाना है, ये बताने के लिये गेट के पास एक ब्यक्ति खड़ा था।
    गेट के पास पहुँचकर वह ब्यक्ति वहाँ खड़े ब्यक्ति से बोला यहाँ अन्दर क्या है? गेट पर खड़े क्यक्ति ने कहा तुमको यहाँ के बारे नहीं पता! वह ब्यक्ति बोला नहीं। गेट वाले ब्यक्ति ने कहा ये फलाने ज्योतिषि सम्राट का घर है, काफी पहुँचे हुये ज्योतिषि हैं ये, इनकी कही गयी बात पत्थर पर खीचीं गई लकीर ही मानों। इतनी संख्या में लोग आते हैं कि इनको पानी पीने तक की फुर्सत नहीं रहती। भूत, भविष्य और वर्तमान के बारे में ये ब्यक्ति का माथा देखते ही बता देते हैं। किसी की कैसी भी मुसीबत हो ये चुटकी में दूर कर देते हैं। वह ब्यक्ति बोला अच्छा! गेट वाला ब्यक्ति फिर से बोला-ये अपने उपायों से किसी ब्यक्ति की मुत्यु तक को टाल देते हैं। रोज ही यहाँ पर लोग काफी सख्या में आते हैं। बोर्ड की ओर इशारा करते हुये बोला इनकी डिग्रियाँ के बारे में देखो हरिद्वार से ज्योतिषि ये डिग्री ली है, बनारस से ज्योतिषि के वो कोर्स किये हैं। आदि-आदि। उस क्यक्ति की जिज्ञासा बढने लगी उसने सोचा क्यों न ज्योतिषि सम्राट से मिल लिया जाय। वो गेट में खड़े ब्यक्ति से बोला-क्या मैं इनसे मिल सकता हूँ ? गेट पर खड़े ब्यक्ति ने कहा वैसे तो आज नम्बर आना मुश्किल है फिर भी आप अन्दर चले जाओ, यदि आज नम्बर नहीं आ पाये तो कल सुबह ही आ जाना। यह बोलकर गेट पर खड़े क्यक्ति ने बताया कि ये लोग जो अन्दर जा रहे हैं,ये वहीं जा रहे हैं। इनके पीछे-पीछे जाओ। अन्य लोग भी जो पहले यहाँ आये थे वो गेट वाले से पूछते कि महाराज जी बैठे हैं क्या? गेट पर खड़ा क्यक्ति किसी को हाँ कहता और किसी को इशारे से ही बता दे रहा था कि हाँ बैठे हैं। वह ब्यक्ति उन लोगों के पीछे हो लिया।
    अन्दर एक हालनुमा कमरे में एक ओर ज्योतिषि बैठे हुये थे और दूसरी ओर काफी संख्या में लोग बैठे हुये थे। जिसका नम्बर आता वो ज्योतिषि के पास जाता। करीब 10 से 15 मिनट तक बात करने के बाद वो ब्यक्ति ज्योतिषि को दक्षिणा देता और उनको बड़ी तन्मयता के साथ प्रणाम करता, इसके बाद अगले ब्यक्ति की बारी आ जाती।
    शाम के समय उस ब्यक्ति की भी बारी आ गयी। उसने भी जैसे अन्य लोग कर रहे थे उसी तरह ज्योतिषि को प्रणाम किया और सामने के आसन पर बैठ गया। ज्योतिषि ने काफी गौर से उसके माथे पर कुछ देर अपनी नजरें जमाये रखी और फिर उसका हाथ देखता हुवा बोला अपनी जनम कुंडली भी लाये हो। उस क्यक्ति ने नहीं में जबाब दिया। कुछ देर हाथ देखने के बाद ज्योतिषि बोले कि राहु-केतु का दोष दिखाई दे रहा है और शनि भी भारी है जो काफी नुकसान करा सकता है। दोष मिटाने के लिये कुछ उपाय करने होंगे। फिर कुछ देर रूककर ज्योतिषि ने कहा दक्षिणा आदि मिलाकर कुल 5 से 7 हजार तक का खर्चा आयेगा इससे जो ग्रह तुम पर बुरा प्रभाव डाल रहे हैं वो शुभ प्रभाव डालने लग जायेंगे और हर प्रकार से तुमको लाभ पहुँचाने लगेंगे।
    पर मेरे पास तो पैसा नहीं है, महाराज। वह ब्यक्ति बोला।
    ज्योतिषि कुछ देर उस ब्यक्ति का चेहरे पर अपनी नजरें गणाई। फिर कुछ देर उस ब्यक्ति का अवलोकन करने के बाद बोले चलो तुम तीन हजार रूपये दे दो। तुम्हारा काम हो जायेगा।
    मेरे पास तो 3000 रूपये नहीं हैं। वह ब्यक्ति बोला।
    ज्योतिषि के पास बड़े-बड़े लोग आते थे और वो ऐसा जबाब शायद सुनने के आदि नहीं थे। उन्होंने फिर गौर से उस ब्यक्ति को देखा। फिर बोले चलो मैं तुम्हें शार्टकट वाला उपाय बता देता हूँ। तुम सिर्फ मेरी दक्षिणा 1001 रूपया दे दो।
    मेरे पास 1001 रूपया नहीं है महाराज। वो ब्यक्ति बोला।
    ज्योतिषि अपने माथे पर बल पड़ बल डाला और फिर बोले- चलो तुम 500 रूपये ही दे दो।
    मेरे पास 500 रूपये नहीं है। वो ब्यक्ति बोला।
    पैसा कम करते-करतेे ज्योतिषि 5 रूपये तक आ गये। और पीछा छुड़ाने वाले अंदाज में बोले। चलो 10 रूपये भगवान की अगरबत्ती के लिये चढ़ा दो। मैं तुम्हें उपाय बता देता हूँ।
    वह ब्यक्ति फिर बोला। मेरे पास तो 5 रूपये भी नहीं है, महाराज।
    ज्योतिषि बोले अच्छा! तुम्हारे पास 5 रूपये भी नहीं हैं! तो क्या बिगाड़ लेंगे तुम्हारा राहु-केतु और क्या बिगाड़ लेगा तुम्हारा शनि। मजे करो। जाओ भइया प्रणाम।

                                                                                                                                          राजेश जोशी।

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